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देशबन्धु ज्ञान मंच-20
प्रधान मंत्री के लिए हाल ही में कौन सा विमान आया है?

B-777
B-811
B-111
B-333

नाम :

जिला:

आयु :

मोबा :


देशबन्धु ज्ञान मंच-19 के सही उत्तर देने वाले पाठक
जगदीश बोनिया, सचिन ओमरे, सुनील कुमार ओमरे, शिवानी ओमरे, विनय कुमार, योगेश विश्वकर्मा, वर्षा विश्वकर्मा, गीता रैकवार, राकेश सिंह, रविशंकर रैकवार, वर्षा जैन राकेश इन्दुरख्या, अंश, योगेश रैकवार, मो शुएब खान, जयंती जैन
कंप्यूटर द्वारा चयनित विजेता
जगदीश बोनिया, योगेश रैकवार, जयंती जैन

१ प्रत्येक प्रश्न १० अंकों का है
२ आपका उत्तर आपके मोबाइल नंबर के साथ स्टोर किया जायेगा
३ सोमवार से शनिवार तक आपको ६ प्रश्नों के उत्तर देने होंगे
४ रविवार को आपके अंकों का योग किया जाएगा
५ अधिकतम अंक पाने वाले को आकर्षक पुरस्कार दिया जायेगा
६ पुरस्कार आपको देशबन्धु के कार्यालय से एक सप्ताह के अंदर आकर लेना होगा
७ एक से अधिक अधिकतम अंक पाने पर कंप्यूटर द्वारा विजेता का चयन होगा
८ सभी सही उत्तर वालों के नाम देशबन्धु के ई-संस्करण पर दिखाए जायेंगे
९ देशबन्धु का निर्णय अंतिम और मान्य होगा
१० देशबन्धु ज्ञानमंच के रात्रि १२ बजे के पहले दिए गए उत्तर ही मान्य होंगें।
देशबन्धु जनमत संग्रह
क्या इंटरनेट पर हर विषय पर जानकारी की उपलब्धता के कारण पेपर पर प्रिंट किताबें लुप्त हो जाएंगी?









आज इंटरनेट हर एक के लिए कुछ न कुछ उपयोगिता लेकर आ रहा है। यहाँ तक कि शालाओं और महाविद्यालयों के छात्र भी अपनी पढ़ाई इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी की सहायता से करते हैं। बहुत सी पुस्तकें भी आजकल पेपर प्रिंट न होकर सीधे इंटरनेट पर प्रकाशित हो जाती हैं। तकनीकी ज्ञान में सतत होती वृद्धि और उन विषयों पर आवश्यक जानकारी के अनुपलब्धता एक गंभीर विषय है। क्या ऐसे में संभव है के आने वाले समय में प्रिंटेड किताबें लुप्त हो जाएँगी। आपके विचार विकल्पों के माध्यम से आमंत्रित हैं। यदि आप और विस्तृत अपने विचार लिखना चाहते हैं तो संपादक को पत्र के रूप में लिख सकते हैं।

विगत सर्वे का परिणाम

देशबन्धु जनमत के विषय "क्या मरणोपरांत व्यक्ति को अंगदान करना चाहिए" पर पाठकों के बड़ी स्पष्ट राय है। लगभग ८१% पाठकों का कहना है कि हाँ यह जरूरी है और सभी को अंगदान करना चाहिए। ९.५% का ये मानना है कि इससे मृत शरीर का अनादर होता है जबकि ९.५% के इसपर कुछ भी कहने में असमर्थ हैं। एक भी ऐसा पाठक नहीं है जो यह मानता हो कि अंगदान के पश्चात् दिवंगत आत्मा का अंतिम संस्कार पूर्ण ना होने के कारण आत्मा मुक्त नहीं होती है। यह आज के समाज की एक प्रगतिवादी सोच का प्रतीक है।


विशेषज्ञ की राय

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से अंगदान को लेकर चौंकाने वाली जानकारी निकलकर सामने आई है। इसके मुताबिक अंगदान को लेकर लोगों के बीच जागरूकता तो बढ़ी है लेकिन इसको लेकर लोगों में अभी भी ढेर सारी भ्रांतिया हैं जो अंगदान को व्यापक बनाने की राह में बाधा हैं। ऊपर से सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि भारत में 10 लाख़ लोगों में से महज़ 0.65 प्रतिशत लोग अंगदान करते हैं।

भारत में अंगदान का औसत भले ही नग्णय हो लेकिन स्पेन में 10 लाख़ में से 48 प्रतिशत, अमेरिका में 33.32 प्रतिशत और ब्रिटेन में 24.52 प्रतिशत लोग अंगदान करते हैं। एम्स से मिली ताज़ा जानकारी के मुताबिक अंगदान में धार्मिक आस्था, परिवार का बंटा हुआ मत और जागरूकता का अभाव, वैधानिक कठनाइए अंगदान कम होने के मुख्य कारण हैं। विकसित देशों में क़ानूनी बाध्यता है की मृत्यु के पश्चात सभी के अंगों का दान होना ही है पर हमारे देश में बिना परिजनों के सहमति के अंगदान नहीं किया जा सकता, हमारे देश का क़ानून अंगदान के लिए व्यावहारिक नहीं है इसलिए अंगदान कम है और अंगदान के अभाव में ज़रूरतमंदों की असमय मौत हो रही है।डॉ पवन स्थापक, जबलपुर

पाठकों की कलम से.....

आपने "अंगदान" के रूप में एक बहुत ही ज्वलंत मुद्दा उठाया है। इस पर ८१ प्रतिशत लोगों का सकारात्मक मत एक अत्यंत सन्तोषजक बात है। आशा है भविष्य में अंगदान करने वालों के संख्या भी बढ़ेगी।
राज, जबलपुर

वर्गीकृत विज्ञापन का आईडिया अच्छा है। मनचाहे आइटम को सेलेक्ट कर के देखने की सुविधा बहुत उपयोगी है। अभी विज्ञापन बहुत कम हैं आशा करता हूँ भविष्य में काफी होंगे। क्या ये विज्ञापन पेपर में भी छप सकते हैं। राकेश गुप्ता, जबलपुर

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